बॉलीवुड के जानेमाने संगीतकार रवींद्र जैन का आज 78वीं बर्थ एनिवर्सरी है। उनका जन्म 28 फरवरी, 1944 को अलीगढ़ में हुआ था। आपको बता दें कि सात भाई-बहनों में रवींद्र जैन तीसरे नंबर के थे। हालांकि, वे बचपन से ही नेत्रहीन थे बावजूद इसके उन्होंने अपने दम पर अपनी पहचान बनाई।
बता दें कि उन्हें बचपन से संगीत का शौक था और अपनी सुरीली आवाज से उन्होंने दर्शकों के दिलों में अपनी अलग पहचान बनाई थी। रवींद्र जैन ने अपनी पढ़ाई अलीगढ़ विश्वविद्यालय के ब्लाइंड स्कूल से पूरी की थी। महज 4 साल की उम्र में ही उन्होंने संगीत की तालीम लेनी शुरू कर दी थी। इसके बाद उन्होंने कोलकाता में कई दिनों तक टीचर के रूप में काम किया। धीरे- धीरे उनकी आवाज का जादू पूरे कोलकाता पर छा गया।
आपको बता दें कि रवींद्र जैन और राज कपूर का एक किस्सा मशहूर है। एक बार राजकपूर ने रवींद्र जैन की परफॉर्मेंस से खुश होकर उनकी पत्नी दिव्या को सवा रुपए दिए थे। रुपए लेकर कहा था कि अगर ये गाना किसी को नहीं दिया है तो मेरा हुआ।हालांकि, बाद में राजकपूर ये बात भूल गए लेकिन उन्हें रवींद्र जैन याद रहे और उनका एक-दूसरे के घर आना-जाना शुरू हो गया। फिर एक दिन रवींद्र, राजकपूर के घर पर बैठे थे, तभी बात करते-करते अचानक वो गहरी सोच में डूब गए।
राज कपूर को सोच में बैठा देख रवींद्र जैन के पूछने पर उन्होंने बताया कि राम तेरी गंगा मैली नाम की फिल्म बना रहा हूं, लेकिन समस्या ये है कि मैंने ही जिस देश में गंगा बहती है बनाई है, मैं ही राम तेरी गंगा मैली बना रहा हूं, लोग क्या सोचेंगे?फिर क्या था राज कपूर की बात सुनते ही रवींद्र जैन ने हारमोनियम उठाया और उसी वक्त एक लाइन बना दी- राम तेरी गंगा मैली हो गई, पापियों के पाप धोते-धोते। इसके बाद राजकपूर ने कहा- बस! अब मैं अपनी फिल्म का टाइटल जस्टिफाई कर सकता हूं। आपको बता दें कि और इस एक लाइन की वजह से रवींद्र जैन को फिल्म में म्यूजिक देने के लिए साइन कर लिया था।
आपको बता दें कि जब रवींद्र जैन कोलकाता में संगीत सीख रहे थे उसी दौरान एक प्रोड्यूसर राधेश्याम झुनझुनवाला ने उन्हें संगीत सिखाने के लिए ट्यूशन पर रखा था। फिर धीरे-धीरे उनकी पहचान बनी और वे मुंबई आ गए। मुंबई आने के बाद उनकी किस्मत खुली और राजश्री प्रोडक्शन की फिल्म सौदागर में उन्हें संगीत देने का मौका मिला। ये फिल्म तो हिट नहीं हुई लेकिन फिल्म का गाना सजना है मुझे सजना के लिए.. बहुत हिच हुआ। इसके बाद रवींद्र राजश्री कैंप का अहम हिस्सा बन गए।
1972 में फिल्म कांच और हीरा की असफलता के बाद उन्होंने फिल्म चोर मचाए शोर, चितचोर, तपस्या, दुल्हन वही जो पिया मन भाए, अंखियों के झरोखों से, राम तेरी गंगा मैली, हिना, इंसाफ का तराजू, प्रतिशोध जैसी कई फिल्मों में संगीत दिया।फिल्मों के अलावा रवींद्र जैन ने टीवी सीरियल रामायण में भी संगीत दिया था साथ ही कई चौपाईयों को उन्होंने अपनी आवाज दी थी। रामायण की वजह से उन्होंने दर्शकों के दिलों में एक अलग ही पहचान बनाई थी। बता दें कि 71 साल की उम्र में 2015 में निधन हो गया था।