ऐसा कहा जाता है कि अगर इंसान के मन में कुछ कर दिखाने का जुनून हो तो उसे राहें अपने आप ही मिल जाती हैं और हर मुश्किल आसान हो जाती है। वैसे देखा जाए तो इस दुनिया में हर इंसान अपने जीवन में कुछ ना कुछ करना चाहता है और दिन रात अपने लक्ष्य को हासिल करने का प्रयास करता है।
आज हम आपको इस लेख के माध्यम से एक ऐसी दृढ़ निश्चयी और बुद्धिशाली महिला के बारे में बताने वाले हैं, जो सिर्फ दसवीं कक्षा तक ही पढ़ी लिखी है परंतु इस महिला ने जो कर दिखाया है, वह अच्छे-अच्छे पढ़े लिखे लोगों के लिए इतना आसान बिल्कुल भी नहीं है। जी, हां इस महिला ने अपने खेत को ही आईलैंड बना दिया है।
हम बात कर रहे हैं उत्तर प्रदेश के कन्नौज के तिरवा तहसील क्षेत्र के बठुआ गांव की रहने वाली किरण कुमारी राजपूत की, इनकी उमरदा प्रखंड के ग्राम गुंडाहा में जिनके पास 23 बीघा जमीन है और उनके खेत ज्यादातर पानी से भरे हुए थे, जिससे उन्हें खेती में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था।
खेतों में पानी होने के कारण किरण कुमारी राजपूत खेती नहीं कर पाई तो उसने सोचा कि क्यों न इस खेत के जलजमाव वाले हिस्से को तालाब में बदल दिया जाए और उसने इस बारे में अपने बेटे से बात की। जिसके बाद बेटे की राय लेकर उन खेतों के पानी से भरे हिस्से को तालाब में तब्दील कर दिया गया।
मछली पकड़ना शुरू किया
खेतों के जलभराव वाले हिस्से को तालाब में बदलने के बाद किरण ने वर्ष 2016 में जल प्रवाह योजना के तहत प्रशासन से 2 लाख रुपये लिए और अपनी जमा पूंजी से कुछ रिश्तेदारों से उधार लेकर मछली पालन शुरू किया। आपको बता दें कि इस काम को शुरू करने में करीब 11 लाख रुपए खर्च किए गए थे।
जैसे-जैसे मछली पालन में लाभ होने लगा, किरण कुमारी राजपूत इस व्यवसाय को आगे बढ़ाना शुरू कर दिया और तालाब के बीच में एक बीघा द्वीप बनाया। पानी के बीच में बना यह आइलैंड देखने में बेहद खूबसूरत लगता है।
आपको बता दें कि उस टापू पर आम, केला, अमरूद, पपीता, आंवला, सहजन के पेड़ और कई तरह के फूल लगाकर बगीचा बनाया गया है। अब पानी के बीच में यह खूबसूरत दिखने वाला टापू लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है और लोग यहां रोजाना घूमने के लिए आते हैं और लोग घूमने के साथ-साथ वोट भी करते हैं।
किरण कुमारी राजपूत के बेटे शैलेंद्र अब इस द्वीप की देखभाल करते हैं। उनका कहना है कि उनके तालाब में चाइना फिश, वध, सील, नैन, ग्रास कटर और सिल्वर फिश हैं। मछली और फल बेचकर हर साल 20 से 25 लाख रुपये मिलते हैं और करीब 5 से 7 लाख रुपये बचत के रूप में आते हैं।
गूगल द्वारा किया गया सम्मानित
किरण कुमारी राजपूत के बेटे शैलेंद्र ने बताया कि, ”गूगल के एक पत्र में तालाब के बीच में द्वीप पर फलों के बगीचे के सुंदर दृश्य के साथ-साथ उनके काम की प्रशंसा की गई थी। इतना ही नहीं गूगल के कर्मचारियों ने वेबसाइट पर फोटो भी अपलोड किए।” आपको बता दें कि गूगल ने किरण कुमारी राजपूत को लेटर ऑफ ऑनर से भी सम्मानित किया था।