इस सदाबहार गाने के लिए लता मंगेशकर बनीं बाथरूम सिंगर,आज तक नहीं हुई ऐसी शूटिंग

Smina Sumra
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Mughal-e-Azam Movie Song

Mughal-e-Azam Movie Song: हिंदी फिल्म इतिहास में कई क्लासिक फिल्में हैं, जैसे कई प्रतिष्ठित गाने हैं जो अमर हो गए हैं। भले ही इस गाने को फिल्माए हुए दशकों हो गए हों, लेकिन यह आज भी उतना ही लोकप्रिय है। इनमें से हर गाने के पीछे एक कहानी है। खासकर पुराने गानों को फिल्माना इतना आसान नहीं था। चूँकि उस समय गानों को उस तरह बनाने की कोई व्यवस्था नहीं थी जिस तरह से आज तकनीक का इस्तेमाल करके बनाया जाता है, इसलिए निर्देशक सहित पूरी यूनिट को काफी मेहनत करनी पड़ती थी।

ऐसा ही एक गाना है जो आज भी अनोखा है और देखने में आनंददायक है, लेकिन उस गाने के सिंगिंग, सेट और फिल्मांकन के लिए पूरी टीम ने दिन-रात मेहनत की, कई दिनों की मेहनत और असफल प्रयासों के बाद, यह प्रतिष्ठित गाना सिनेमाघरों में रिलीज़ हुआ। पृथ्वीराज कपूर, दिलीप कुमार और मधुबाला अभिनीत इस फिल्म के पीछे की गई मेहनत रंग लाई और फिल्म सुपरहिट साबित हुई।

गाने में इको साउंड इफेक्ट की जरूरत

Mughal-e-Azam Movie Song
Lata mangeshkar

यह गाना मुगल-ए-आजम फिल्म का है, जब प्यार किया तो डरना क्या। अकबर के सामने जमीन पर लेटी अनारकली से भरी महफिल में गाया गया यह गाना प्रेमियों के विद्रोह का प्रतीक है। सलीम के प्यार में पड़ी अनारकली बादशाह अकबर को चुनौती देती है। यह फिल्म अपने आप में एक इतिहास समेटे हुए है। यह तो सभी जानते हैं कि फिल्म सुपरहिट थी, लेकिन कोई नहीं जानता कि फिल्म के हर सीन, सेट और गाने के पीछे कितनी मेहनत लगी है।

इस गाने की ही बात करें तो इस गाने में इको साउंड इफेक्ट की जरूरत थी। उस समय तकनीक नहीं थी, इसलिए कोकिलकंठी लता मंगेशकर ने इस गाने को बाथरूम में रिकॉर्ड किया था। अगर आप फिल्म का गाना सुनेंगे तो उसमें इको साउंड है, जिसे लाने के लिए लताजी को बाथरूम सिंगर बनना पड़ा था

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रद्द कर दिया गया Mughal-e-Azam Movie Song 

1960 में रिलीज हुई फिल्म ‘मुगल-ए-आजम’ को बनने में 14 साल लगे थे। प्यार किया तो डरना क्या के सेट पर दो साल लगे थे। इस गाने के लिए एक शीशमहल लगाया गया था। ऐसी कोरियोग्राफी थी कि जब मधुबाला डांस करती हैं तो वह एक शीशे में दिखाई देती हैं, लेकिन यह शूटिंग इतनी आसान नहीं थी।

हॉलीवुड से एक्सपर्ट बुलाए गए, लेकिन उन्होंने भी मना कर दिया। चारों तरफ निराशा फैल गई और बात 15 लाख रुपए की लागत से बने शीशमहल को तोड़ने तक पहुंच गई, लेकिन फिर सिनेमैटोग्राफर आरडी माथुर (Mughal-e-Azam Movie Song) ने इसका हल निकाला।

आज तक नहीं हुई ऐसी शूटिंग 

समस्या यह थी कि जैसे ही कैमरा लगता, उसकी रोशनी शीशे पर पड़ती। इसे रोकने के लिए रिफ्लेक्टर लगाए गए, लेकिन जब रोशनी उन पर पड़ती तो आंखें बंद हो जातीं और शूटिंग मुश्किल हो जाती। माथुर ने अपने कैमरे से सेट पर एक ऐसा कोना ढूंढ निकाला, जहां से कोई रिफ्लेक्शन न आता हो आज तक किसी भी गाने को इस तरह से फिल्माया नहीं गया है।

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