बैंक की सरकारी नौकरी छोड़ सिनेमा में खाए धक्के, फिर यूं बने CID के एसीपी प्रद्युमन

Ranjana Pandey
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बॉलीवुड और टीवी के मशहूर अभिनेता शिवाजी साटम का 21 अप्रैल को जन्मदिन है. शिवाजी नाम सुनते ही बेशक आप उनका चेहरा याद न कर पाएं लेकिन CID के एसीपी प्रद्युमन को पहचानना आपके लिए मुश्किल नहीं होगा. उन्होंने कई बड़े कलाकारों के साथ काम कर फिल्मी पर्दे पर बेहतरीन छाप छोड़ी है. सीआईडी से मिली लोकप्रियता के बाद उन्हें लोग सचमुच का एसीपी समझते हैं

एसीपी प्रद्युमन बनकर मिली लोकप्रियता
शिवाजी ने ‘वास्तव’, ‘गुलाम-ए-मुस्तफा’, ‘सूर्यवंशम’, ‘नायक’ जैसी 35 से अधिक सुपरहिट फिल्मों में काम किया है. इसके अलावा वह मराठी और अंग्रेजी फिल्मों में भी काम कर चुके हैं. ‘एक शून्य शून्य’ सीरियल में शिवाजी साटम एसीपी श्रीकांत पाटकर की भूमिका निभाते नजर आए थे लेकिन लोकप्रियता उन्हें सीआईडी का एसीपी प्रद्युमन बनकर ही मिली.

बैंक में कैशियर थे शिवाजी
फिल्मी दुनिया में आने से पहले शिवाजी सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में कैशियर की नौकरी करते थे. लेकिन अभिनय में उनकी रूचि ने उन्हें थियेटर ग्रुप ज्वाइन करने पर मजबूर किया. वे अपनी जॉब से टाइम निकालकर थियेटर सीखने जाते थे. इंटर बैंक स्टेज कॉप्टीशन के दौरान थियेटर एक्टर बाल धूरी ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और मौका दिया. कुछ समय थियेटर सीखने के बाद उन्हें रिश्ते-नाते नाम का शो मिला. उन्होंने साल 1988 में फिल्म ‘पेस्टनजी’ से बॉलीवुड में कदम रखा था.

सीआईडी के लिए जीते कई पुरस्कार

वह सीआईडी में 1997 से काम कर रहे हैं और अपने इस किरदार के कारण कई सारे पुरस्कार भी जीत चुके हैं. बीपी सिंह के निर्देशन में बना ये शो भारतीय टेलीविजन पर सबसे लंबा चलने वाला शो रहा. इसका पहला एपिसोड 23 साल पहले 21 जनवरी 1998 में ऑन एयर किया गया था जो साल 2018 तक चला. इस शो के दौरान शिवाजी के कुछ डायलॉग जैसे ‘कुछ तो गड़बड़ है, दया दरवाजा तोड़ दो…’ बेहद पॉपुलर रहे.

 

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