भारत ने दिया 76,000 करोड़ रुपये का लुभावना ऑफर, तो INTEL दौड़ा चला आया

Ranjana Pandey
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वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर चिप की कमी देखते हुए अब अमेरिका की चिप निर्माता कंपनी इंटेल भारत में अपनी सेमीकंडक्टर निर्माण इकाई स्थापित करने में रुचि दिखा रही है। यह खबर तब आई जब कुछ दिनों पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत को हाई-टेक उत्पादन के लिए एक वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को मजबूत करने के लिए सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम के लिए 76,000 करोड़ रुपये के नीतिगत प्रोत्साहन को मंजूरी दी।

सेमीकंडक्टर चिप की कमी के बीच, न केवल कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ी है, बल्कि कई देश भी इस रेस में आगे निकलने के लिए नीति पर काम कर रहे हैं। वैश्विक स्तर पर कई देश भी सिलिकॉन उत्पादन में तेजी लाने के लिए लगातार काम कर रहे हैं। उसे देखते हुए इस महीने की शुरुआत में, भारत के मंत्रिमंडल ने सेमीकंडक्टर के देश में ही उत्पादन एक प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दी थी।इस कदम में 6 वर्षों में 20 से अधिक विनिर्माण इकाइयाँ स्थापित करना शामिल होगा, और यह न केवल बड़ी मौजूदा कंपनियों को बल्कि सेमीकंडक्टर को डिजाइन और बनाने की तलाश में स्टार्टअप को भी प्रोत्साहित करने के लिए काम करेगा। योग्य कंपनियां भारत में नए फैब के लिए अपनी स्थापना और संचालन लागत का 50% तक प्राप्त कर सकती हैं। 76,000 करोड़ रुपये (लगभग 10 बिलियन अमरीकी डालर) की प्रोत्साहन योजना में सेमीकंडक्टर इंजीनियरों को प्रशिक्षित करने की योजना भी शामिल है। इससे एक बात तो स्पष्ट है कि भारत चिप उत्पादन में तेजी लाने के लिए गंभीर है।

जब इस प्रोत्साहन पैकेज पर इंटेल के फाउंड्री सर्विसेज के अध्यक्ष, रणधीर ठाकुर की नजर पड़ी तो वह इसकी सराहना करने से स्वयं को रोक नहीं पाये। ठाकुर ने एक ट्वीट में प्रोत्साहन की प्रशंसा करते हुए लिखा, “इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय, अश्विनी वैष्णव, राजीव चंद्रशेखर को इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर्स के हब के रूप में भारत के लिए सेमीकंडक्टर डिजाइन और विनिर्माण प्रोत्साहन के लिए बधाई।”इसके बाद भारत सरकार के मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भारत में इंटेल का स्वागत करते हुए रीट्वीट किया। फैबलेस निर्माता का देश में स्वागत करते हुए, आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक ट्वीट में कहा, “इंटेल – भारत में आपका स्वागत है।”

इंटेल पहले चीन में चिप उत्पादन का विस्तार करने की मांग कर रहा था। हालांकि, इसे अमेरिकी सरकार नहीं चाहती कि एक बार फिर से वह सेमीकंडक्टर जैसे महत्वपूर्ण उत्पाद के लिए चीन पर निर्भर रहे।यही कारण है कि अमेरिकी सरकार ने अमेरिका में ही चिप्स के निर्माण और विकास में $52 बिलियन अमरीकी डालर का निवेश करने के प्रोत्साहन पैकेज को पास किया था। हालांकि इंटेल ने कुछ दिनों पहले ही मलेशिया में नई चिप-पैकेजिंग फैक्ट्री में $7 बिलियन का निवेश करने की घोषणा की थी। अब जिस तरह से इंटेल के शीर्ष अधिकारी ने भारत के प्रोत्साहन पैकेज की सराहना की है उससे यह स्पष्ट कि आने वाले समय में यह कंपनी भारत में भी निवेश कर सकती। बता दें कि टाटा समूह आउटसोर्स सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्टिंग संयंत्र में करीब 30 करोड़ डॉलर का निवेश करने जा रहा है।

 

इसी तरह टाटा के बाद अब सेमीकंडक्टर की दौड़ में हुई वेदांता समूह ने भी 60,000 करोड़ रुपये निवेश का किया वादा किया है।भारत सरकार के पैकेज से न सिर्फ इंटेल बल्कि अन्य कंपनियाँ भी भारत में निवेश करने के लिए उत्साहित होंगी। यह सामरिक महत्व और आर्थिक आत्मनिर्भरता के इन क्षेत्रों में भारत के तकनीकी कौशल को मजबूत करेगा। यह कार्यक्रम न सिर्फ पूंजीसमर्थन और तकनीकी सहयोग की सुविधा के द्वारा अर्धचालक और प्रदर्शन निर्माण को बढ़ावा देगा।

सरकार ने सिलिकॉन सेमीकंडक्टर फैब, डिस्प्ले फैब, कंपाउंड सेमीकंडक्टर्स, सिलिकॉन फोटोनिक्स, सेंसर फैब्स, सेमीकंडक्टर पैकेजिंग और सेमीकंडक्टर डिजाइन में लगी कंपनियों के लिए आकर्षक प्रोत्साहन सहायता की व्यवस्था की है। मोदी सरकार 5G उपकरणों से लेकर इलेक्ट्रिक कारों तक सब कुछ आपूर्ति करने के लिए भारत में अनुमानित $ 7.5 बिलियन का एक चिप प्लांट लाने के लिए ताइवान के साथ उन्नत बातचीत कर रही है। ऐसे समय में जब दुनिया सेमीकंडक्टर की कमी का सामना कर रही है और अमेरिका के साथ-साथ यूरोपीय संघ सेमीकंडक्टर फर्मों को अपने क्षेत्रों में आकर्षित करने की कोशिश में लगे हैं। दूसरी ओर भारत सरकार अरबों डॉलर की पूंजी सहायता और PLI यानी Production Linked Incentive से देश में सेमीकंडक्टर के निर्माण को बढ़ावा देने पर काम कर रही है। अब जल्द ही भारत में इसका परिणाम देखने को मिल सकता है।

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