सात साल में सात जन्मों का बंधन खत्म… बैडमिंटन स्टार Saina Nehwal  का हुआ डायवोर्स

Smina Sumra
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Saina Nehwal Divorce : भारत की पूर्व विश्व नंबर-1 महिला बैडमिंटन स्टार साइना नेहवाल ने सबको चौंका दिया है।  स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल ने अपने पति कश्यप पारुपल्ली से तलाक लेने का फैसला किया है। इसकी घोषणा उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए की।

हालाँकि, उनके अलग होने की असली वजह अभी तक सामने नहीं आई है। साइना ने कश्यप के साथ बिताए पलों के लिए खुशी जताई। साइना ने लिखा, “मैं इन यादों के लिए हमेशा आभारी रहूँगी और आपको आगे बढ़ने के लिए शुभकामनाएँ देती हूँ। ऐसे समय में हमारी निजता को समझने और उसका सम्मान करने के लिए धन्यवाद।”

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सोशल मीडिया पर Saina Nehwal Divorce की खबर

मशहूर बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल ने अपने पति परुपल्ली कश्यप से अलग होने (Saina Nehwal Divorce) के फैसले की घोषणा सोशल मीडिया पर एक नोट शेयर कर दी। 

35 वर्षीय साइना ने इस कठिन परिस्थिति में उनकी निजता को समझने और उसका सम्मान करने के लिए पी. कश्यप और प्रशंसकों को धन्यवाद दिया ।

कफल ने 2018 में शादी की थी और हैदराबाद स्थित पुलेला गोपीचंद अकादमी में साथ-साथ प्रशिक्षण लिया था। साइना ने इंस्टाग्राम पर अपने इस फैसले की जानकारी दी, जो फैंस के लिए एक सरप्राइज की तरह था।

Saina Nehwal Divorce  का फैसला

साइना ने रविवार को इंस्टाग्राम स्टोरी में कहा, “ज़िंदगी कभी-कभी हमें अलग-अलग रास्तों पर ले जाती है। बहुत सोचने के बाद, पारुपल्ली कश्यप और मैंने अलग होने का फैसला किया है। हम एक-दूसरे की शांति और तरक्की की कामना करते हैं। मैं हमारी यादों के लिए आभारी हूँ और सभी से हमारी निजता का सम्मान करने का अनुरोध करती हूँ।” हालाँकि, पारुपल्ली ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।

बैडमिंटन में साइना की ऐतिहासिक सफलता

साइना नेहवाल ने 2012 के लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया। 2015 में, वह विश्व बैडमिंटन रैंकिंग में नंबर एक स्थान पर पहुँचने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। 2008 के बीजिंग ओलंपिक में क्वार्टर फ़ाइनल तक पहुँचने से भारत में बैडमिंटन को नई जान मिली। उनकी उपलब्धियों ने खिलाड़ियों की एक नई पीढ़ी को प्रेरित किया जिसने भारत को एक वैश्विक प्रतीक बनाया।

रैंकिंग में नंबर एक पर पहुंचने वाली पहली खिलाड़ी

2015 में, साइना नेहवाल बैडमिंटन रैंकिंग में नंबर एक स्थान पर पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनीं।

पारुपल्ली कश्यप की बैडमिंटन यात्रा

पारुपल्ली कश्यप की बात करें तो, 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स में ब्रोंज मेडल  जीतने के बाद, वह 2012 के लंदन ओलंपिक के क्वार्टर फाइनल में पहुँचने वाले पहले भारतीय पुरुष शटलर बने। कश्यप ने 2013 में अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ रैंकिंग हासिल की और छठे स्थान पर पहुँच गए। 2014 में, उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर 32 साल का इंतज़ार खत्म किया।

 

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