मुकेश अंबानी का नाम दुनिया के सबसे अमीर लोगों की सूची में शामिल हैं.रिलायंस इंडस्ट्री के चेयरमैन व मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश अंबानी की संपत्ति करीब 71.2 बिलियन डॉलर बतायी जाती है.आज मुकेश अम्बानी दुनिया के सफर व्यक्तियों में से हैं, पर कहते हैं सफल होने के लिए गुरु का होना जरुरी है.ये बात हर इंसान पर लागू होती है फिर चाहे वो गरीब हो या अमीर.तो आइए आपको मुकेश अंबानी के उस गुरु के बारे में बताते हैं जिनसे बात करके ही मुकेश अंबानी और पूरा अंबानी परिवार फैसला लेता है.
अंबानी परिवार के गुरु का नाम रमेशभाई ओझा हैं, ओझा गुजरात के पोरबंदर में संदीपनी विद्यानिकेतन आश्रम चलाते हैं. रमेशभाई, धीरूभाई अंबानी के वक्त से ही अंबानी परिवार के आध्यात्मिक गुरु हैं. मुकेश अंबानी और नीता अंबानी के विवाह में भी रमेशभाई की बड़ी भूमिका रही थी.वहीं धीरूभाई अंबानी के निधन के बाद दोनों भाइयों के बीच आपसी सुलह कराने में भी उनका योगदान रहा है. इसके अलावा जब धीरूभाई अंबानी मेमोरियल का उद्घाटन था, तब उस कार्यक्रम की अध्यक्षता भी रमेशभाई ओझा ने ही की थी.
रमेशभाई ओझा के भाई गौतम ने एक इंटरव्यू में बताया था कि रमेशभाई ओझा मीडिया से दूर रहते हैं और पहली बार उनकी कोकिलाबेन अंबानी से मुलाकात उनके घर पर ही हुई थी.यह 1997 की बात है.दरअसल, कोकिलाबेन अकसर रमेश भाई ओझा के वीडियो देखा करती थीं, जिनसे वह काफी प्रभावित थीं.इसके बाद उन्होंने रमेश भाई ओझा से अपने मुंबई स्थित आवास में राम कथा के कार्यक्रम का आग्रह किया था.यह कार्यक्रम एक सप्ताह तक चला था, यहीं से अंबानी फैमिली और ओझा के बीच संबंधों की शुरुआत हुई.

रमेशभाई ओझा की प्रसिद्धि का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इनके आश्रम में गुजरात के कई बड़े नेता भी आते है। इसके अलावा जब सुषमा स्वराज ने गीता को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करने की मांग की थी, तो इसके पीछे रमेश भाई ओझा ही थे.उन्होंने ही सुषमा स्वराज को ये विचार दिया था.पीएम मोदी भी उनकी बेहद इज्जत करते हैं.ये भी एक वजह है कि भारत के सबसे अमीर इन्सान मुकेश अम्बानी अपने किसी भी बड़े फैसले से पहले अपने आध्यात्मिक गुरु रमेशभाई ओझा से सलाह-मश्वरा करते हैं.
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