इस फेमस विलेन को जब पहचानना हो गया था मुश्किल, मौत से पहले रह गया था हड्डियों का ढांचा

Ranjana Pandey
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बॉलीवुड फ़िल्में विलेन के बिना अधूरी मानी जाती हैं. ये सिलसिला आज से नहीं, बल्कि शुरुआत से ही जारी है. ख़ासकर 80 और 90 के दशक में विलेन का किरदार उतना ही दमदार होता था, जितना फ़िल्म के हीरो का होता था.

लेकिन समय के साथ इसमें आज काफ़ी बदलाव हो चुके हैं. 80 और 90 के विलेन या तो हीरो के परिवार को ख़त्म कर देते थे या फिर उसकी संपत्ति हड़प लेते थे, लेकिन 21वीं सदी के विलेन बेहद हाईटेक हो चुके हैं. ये चंद मिनटों में हीरो के बैंक अकाउंट को हैक कर उसे कंगाल कर डालते हैं.

सच कहें तो असल मज़ा तो 90’s की फ़िल्मों में हीरो और विलेन की गुत्थम-गुत्थी देखने में ही आता था. इस दौरान कभी-कभी तो विलेन इतना ख़ूंखार होता था कि मन तो करता था उसे गोली से भून डालें, लेकिन वो विलेन आज की फ़िल्मों कहां ही देखने को मिलते हैं.

 

80 और 90 के दशक में प्राण, प्रेम चोपड़ा, अजीत, रंजीत, अमजद ख़ान, अमरीश पूरी, डैनी डेंज़ोंग्पा, शक्ति कपूर और गुलशन ग्रोवर समेत कई विलेन काफ़ी मशहूर हुए थे. इन्हीं में से एक ख़ूंखार विलेन ‘चिकारा’ उर्फ़ रामी रेड्डी भी थे, जो अपनी दमदार एक्टिंग से फ़िल्म का माहौल ही बदल डालते थे.

 

कौन थे रामी रेड्डी

रामी रेड्डी का जन्म 1 जनवरी, 1959 को आंध्र प्रदेश के चित्तूर ज़िले के वाल्मीकिपुरम में हुआ था. उनका पूरा नाम गंगासानी रामी रेड्डी है. वो हिंदी के साथ-साथ साउथ फ़िल्म इंडस्ट्री के अभिनेता भी थे. रेड्डी ने 1980 में हैदराबाद की ‘उस्मानिया यूनिवर्सिटी’ से ‘बैचलर इन जर्नलिज़म’ किया था. साउथ फ़िल्म इंडस्ट्री में कदम रखने से पहले उन्होंने बतौर जर्नलिस्ट Mf Daily में काम भी किया था.

एक्टिंग करियर की शुरुआत

रेड्डी ने अपनी अभिनय करियर की शुरुआत 1990 में आई तेलुगु फ़िल्म ‘अंकुसम’ से की थी. इसके बाद 1990 में ही उन्होंने ‘प्रतिबंध’ फ़िल्म के ज़रिए बॉलीवुड में डेब्यू किया. इस फ़िल्म में उन्होंने गैंगस्टर ‘नाना’ का किरदार निभाया था. इसके बाद रेड्डी ने 1993 तक कई तमिल, तेलुगु और मलयालम फ़िल्मों में भी अपनी दमदार एक्टिंग के जलवे बिखेरे. लेकिन बॉलीवुड फ़िल्म ‘वक़्त हमारा है’ ने उनकी किस्मत पलट दी.

चिकारा’ के किरदार से बनी पहचान

रामी रेड्डी ने साल 1993 में अक्षय कुमार और सुनील शेट्टी स्टारर ‘वक़्त हमारा है’ फ़िल्म में कर्नल ‘चिकारा’ का दमदार किरदार निभाया था. फ़िल्म में ‘चिकारा’ का ये किरदार दर्शकों को इतना पसंद आया कि लोग रेड्डी को इसी नाम से जानने लगे. इसके बाद वो साल 1994 में अजय देवगन स्टारर ‘दिलवाले’ फ़िल्म में वो ‘बंशुल सिंह’ नाम के नेगेटिव रोल में नज़र आये थे. संयोग से रेड्डी ने अपनी अधिकतर बॉलीवुड फ़िल्में मिथुन चक्रवर्ती के साथ की थीं.

 

इन किरदारों ने बनाया फ़ेमस विलेन

रामी रेड्डी ने ऐलान (माना शेट्टी), खुद्दार (स्वामी पाटिल), अंगरक्षक (वेल्लु), आंदोलन (बाबा नायक), हक़ीक़त (अन्ना), अंगारा (हौंडा दादा), रंगबाज़ (नंदू), कालिया (भवानी सिंह), लोहा (टकला), गुंडा (काला शेट्टी), चांडाल (दुर्जन राय), दादा (यशवंत) और जानवर फ़िल्म में ‘रघु शेट्टी’ के किरदार से बॉलीवुड में अपनी एक अलग पहचान बनाई.

रेड्डी को बॉलीवुड में उनकी नकारात्मक भूमिकाओं के लिए ही ज़्यादा जानता है. लेकिन साउथ फ़िल्म इंडस्ट्री में वो कई शानदार चरित्र भूमिकायें निभा चुके हैं. खासकर उन्हें उनकी ज़बरदस्त कॉमेडी टाइमिंग के लिए जाना जाता है. इसके अलावा वो निर्देशक और निर्माता के तौर पर भी इंडस्ट्री में सक्रिय रहे. रेड्डी तेलुगु, तमिल, कन्नड़, हिंदी, मलयालम और भोजपुरी भाषाओं में खलनायक और चरित्र अभिनेता के रूप में 250 से अधिक फ़िल्मों में अभिनय किया.

रामी रेड्डी लीवर और किडनी की बीमारी से पीड़ित थे. इसी वजह से 14 अप्रैल, 2011 को सिकंदराबाद के एक निजी अस्पताल में उनका निधन हो गया था. जब उनकी मृत्यु हुई तब वो केवल 52 साल के थे. रेड्डी को आज भी दर्शक ‘चिकारा’ के नाम से ही जानते हैं.

रामी रेड्डी की आख़िरी बॉलीवुड साल 2003 में रिलीज़ हुई धर्मेंद्र स्टारर ‘टाडा’ थी. इस फ़िल्म में उन्होंने ‘बिट्ठल राव’ का किरदार निभाया था. इसके बाद वो साउथ फ़िल्म इंडस्ट्री में सक्रिय हो गये. साल 2010 में रिलीज़ हुई तेलुगु फ़िल्म ‘Anaganaga Oka Aranyam’ बतौर अभिनेता रेड्डी की आख़िरी फ़िल्म थी.

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