बॉलीवुड फिल्म ‘गंगा की सौगंध’ के बाद एक बार फिर सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ऋषिकेश के गंगा तट पर शूटिंग करते हुए नजर आ रहे हैं। वहीं, शूटिंग से मिले ब्रेक के दौरान उन्होंने गीता भवन और स्वर्ग आश्रम के बीच चलने वाली नाव में बैठकर अपने पुराने दिनों को याद किया। बता दें कि डॉन फिल्म का मशहूर गाना ‘छोरा गंगा किनारे वाला…’ उनकी मूल पहचान भी है, क्योंकि इलाहाबाद के रहने वाले अमिताभ बच्चन का गंगा से लगाव बचपन से रहा है।
बहरहाल, ऋषिकेश में 47 साल पहले ‘गंगा की सौगंध’ फिल्म की शूटिंग हुई थी और इस फिल्म ने अमिताभ को सिल्वर स्क्रीन पर एक नई पहचान दी थी। इस फिल्म के कारण लक्ष्मण झूला पूरे देश में चर्चा का विषय बना था। यही नहीं, यहां का विश्व प्रसिद्ध मंदिर फिल्म के आखिर में नजर आया था। वहीं, एक लंबे अर्से बाद एक बार फिर अमिताभ बच्चन ऋषिकेश में हैं और अपने पुराने दिनों को याद कर रहे हैं।
गुडबाय की शूटिंग कर रहे हैं बिग बी
अमिताभ बच्चन शनिवार की सुबह ऋषिकेश पहुंचे। इस दौरान उन्होंने गीता भवन घाट पर अपनी आनी वाली फिल्म ‘गुडबॉय’ के लिए दृश्य फिल्माए। इसके बाद फिल्म की शूटिंग के बीच ब्रेक लेकर सदी के महानायक ने ऋषिकेश के नव घाट पर नाव में बैठ कर आनंद लिया। बता दें कि बिग बी अभी कुछ दिन और ऋषिकेश में रुकेंगे और वहीं अलग अलग जगह में शूटिंग करते नजर आएंगे। इस फिल्म में उनके साथ अभिनेत्री रश्मिका मंदाना और सह अभिनेता सुनील ग्रोवर भी हैं।
इन लोकेशनों पर होगी शूटिंग?
फिल्म की शूटिंग ऋषिकेश के राम झूला, लक्ष्मण झूला, जानकी सेतु, सीता घाट, रानीपोखरी चौक और जौली ग्रांट एयरपोर्ट सहित कई स्थानों पर होगी। फिल्म प्रोडक्शन यूनिट धीरे धीरे ऋषिकेष पहुंचने लगी है। शूटिंग के लिए यूनिट को 27 मार्च से 6 अप्रैल तक का स्लॉट दिया गया है। लेकिन बताया जा रहा है कि आज से ही शूटिंग शुरू होने की संभावना है।
बता दे की सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने फिल्म ‘सात हिंदुस्तानी’ से बॉलीवुड इंडस्ट्री में अपना पहला कदम रखा था, जो 7 नवंबर 1969 को रिलीज हुई थी। ख्वाजा अहमद अब्बास ‘सात हिन्दुस्तानी’ के निर्माता, निर्देशक ही नहीं लेखक और पटकथा लेखक भी थे। यह फिल्म गोवा को पुर्तगाली शासन से आजाद कराने की कहानी पर बनी थी। पुर्तगालियों से इस मुश्किल और खतरनाक लड़ाई को लड़ने के लिए अब्बास ने ‘सात हिन्दुस्तानी’ की अपनी जिस फौज की रचना की थी उसमें देश के अलग-अलग हिस्सों और विभिन्न धर्मों के लोगों को पात्र बनाया था। इस फिल्म को उस वर्ष राष्ट्रीय एकता पर बनी सर्वश्रेष्ठ फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला।