बॉलीवुड एक्टर अरशद वारसी को फिल्म इंडस्ट्री में बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग के लिए जाना जाता है, मगर यह बात बहुत ही कम लोग जानते हैं कि वो फिल्मों में आने से पहले सेल्समैन का काम किया करते थे। हालांकि इसका कारण कमजोर आर्थिक स्थिति थी। इसके बाद अरशद ने फोटो लैब में भी काम किया और फिर कुछ समय बाद डांसिंग ग्रुप ज्वाइन कर लिया।

अरशद मुंबई के मुस्लिम परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनका जन्म 19 अप्रैल 1968 को हुआ था। अरशद की प्रारंभिक शिक्षा नासिक, महाराष्ट्र में हुई। हालांकि दसवीं के बाद ही अरशद ने स्कूल छोड़ दिया था। अरशद की पत्नी मारिया गोरेट्टी एक वीजे हैं। दोनों की मुलाकात अरशद की डांस एकेडमी में हुई थी।

बात सन 1991 की है अरशद उस वक्त एक डांस ग्रुप चलाते थे। उन्हें मुंबई के सेंट जेवियर कॉलेज में आयोजित मल्हार फेस्टिवल में बतौर जज आमंत्रित किया गया था। वहां उन्होंने सेंट एंड्रयू कॉलेज की प्यारी सी मुस्कान वाली छात्रा मारिया गोरेटीको देखा, जो कॉम्पटीशन में हिस्सा लेने आई थीं। वहीं पहली नजर में अरशद मारिया को अपना दिल दे बैठे थे।

पहली नजर में प्यार हो जाने के बाद अरशद ने मारिया को अपने डांस ग्रुप में शामिल होने का प्रस्ताव रखा। इस तरह मारिया अरशद को असिस्ट करने लगीं। दोनों की मुलाकात भी होने लगीं। अरशद के मुताबिक मेरे दोस्तों ने कई बार मुझे कहा था कि मारिया तुमसे प्यार करती है, लेकिन अरशद जब भी खुद यह सवाल करते तो मारिया इनकार कर देतीं।

वह अरशद को चाहती तो थीं, मगर स्वीकार नहीं कर रही थी। अरशद ने एक इंटरव्यू में बताया था हम दोनों दुबई टूर पर गए थे, तब मैंने मारिया की कोल्ड ड्रिंक में बियर मिला दी। मारिया को नशा चढ़ गया और उसने मुझसे प्यार करने की बात खुद बोल दी।

वैलेंटाइन-डे के दिन शादी

अरशद से शादी के लिए मारिया के पैरेंट्स तैयार नहीं थे, उन्हें लगता था फिल्मी दुनिया के लोगों की शादी टिकती नहीं है। मगर अरशद से मिलने के बाद उन्होंने इस शर्त पर रजामंदी दी कि शादी चर्च में होगी। जबकि अरशद का परिवार मुस्लिम रिवाजों से निकाह कराना चाहता था। आखिर दोनों ने तय किया कि वह वैलेंटाइन-डे के दिन शादी करेंगे और दोनों ने 14 फरवरी 1999 को ईसाई और मुस्लिम दोनों रीति रिवाज से शादी की। 20 साल की उम्र में अपने माता-पिता को खो चुके अरशद के लिए मारिया सबसे बड़ा सपोर्ट सिस्टम हैं।

बेहद मुश्किलों का सामना किया था

सिर्फ 20 साल की उम्र में मुंबई जैसे बड़े शहर में किसी लड़के के सर से उसके मां बाप का साया उठ जाना कितना दुख भरा होता होगा ये सोच पाना भी बेहद मुश्किल है। ये घटना किसी भी इंसान को उसके सपनों से दूर करने के लिए काफी है। लेकिन बॉलीवुड अभिनेता अरशद वारसी उन लोगों में से हैं, जिन्होंने अपनी मुश्किलों को ही अपनी ताकत में तब्दील कर लिया और अपने लिए एक नया मुकाम बनाया। अरशद वारसी को साल 2003 में आई फिल्म ‘मुन्ना भाई एमबीबीएस’ से पहचान मिली मगर हिंदी सिनेमा में उनका सफर सालों पहले शुरू हुआ था।

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