इंसान के दिन कब फिर जाए ये कोई नहीं कहता …और असलियत में बुढ़ापा का दौर किसी भी इंसान के लिए अपनी जिंदगी को कसौटी पर तौलने के लिए ही जाना जाता है। जब आप बूढ़े हो जाते हैं तब इस बात का पता चलता है कि कौन अपना आपके साथ खड़ा है।

 

कई  मामलों में खुद की संतानें भी अपने माता-पिता को मरने के लिए सड़क पर छोड़ जाते हैं। बॉकी चकाचौंध भरी दुनिया में ऐसे कई शख्सियत है जो अपने जमाने में लोगों की पलकों पर बैठा करते थे लेकिन आज गुमनाम और मुफलिसी की जिंदगी जी रहे हैं।

 

आज हम बात कर रहे हैं. गुजरे जमाने की वेटरन एक्सट्रेस सविता बजाज की जिनकी फिल्म नदिया के पार ने बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़ बिजनेस किया। इस फिल्म के बूते सविता रातों-रात स्टार बन गईं. करोड़ों रुपए कमाए और दूसरे लोगों की मदद की । लेकिन आज वो खुद पाई-पाई को मोहताज हो गई हैं।

सविता के फिर गए दिन 

सविता बजाज  कोरोना काल में पूरी तरह से कंगाल हो गईं। कोरोना की चपेट में आने के बाद उनकी बिगड़ती सेहत ने उन्हें अस्पताल में जाने को मजबूर कर दिया । जहां उनकी सारी जमा पूंजी इलाज में खत्म हो गई। मुश्किल घड़ी में परिवार ने भी सविता को साथ रखने से मना कर दिया। उन्होंने मदद के लिए कई लोगों से गुहार लगाई। लेकिन उनकी गुहार उनके परिवार ने नहीं सुनी। सविता की मानें तो उनके बेटों ने भी उनसे मुंह फेर लिया है।

मदद के लिए आगे आए हाथ

सविता बजाज की तकलीफ को देखते हुए राइटर्स एसोसिएशन और CINTAA की तरफ से उन्हें कुछ मदद मिलती है।  राइटर्स एसोसिएशन की तरफ से उन्हें हर महीने 2 हजार रुपये और सिंटा की ओर से उन्हें हर महीने 5 हजार रुपए का भुगतान किया जाता है । जिससे वो किसी तरह से अपना गुजर बसर कर पाती हैं।सविता बजाज अब तक ‘निशांत’, ‘नजराना’, ‘बेटा हो तो ऐसा’ जैसी फिल्मों में काम कर चुकीं हैं। इसके अलावा कविता ने नुक्कड़, मायका और कवच जैसे लोकप्रिय सीरियल में भी काम किया है।

 

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