हिंदुस्तान के सबसे धनवान व्यक्ति जिनसे बादशाह और अंग्रेज भी लिया करते थे कर्जा

हिंदुस्तान के सबसे धनवान व्यक्ति जिनसे बादशाह और अंग्रेज भी लिया करते थे कर्जा

अंग्रेजो के हिंदुस्तान में आने से पहले हमारा भारत भी सोने की चिड़िया हुआ करता था ,लेकिन अंग्रेजो ने हमारे देश को पूरी तरह से लुटा ख्सुटा और देश को गरीब कर दिया .हमारा देश जब धनवान हुआ करता था तो उसका सबसे बड़ा कारण था हमारे यहाँ के राजा और रजवाड़े जिनके यहा खजानों को ढेर लगा रहता था .

हमारी भी जनता गरीब नहीं थी ,अंग्रेजो के भारत आने से पहले हमारे देश में ऐसे राजा और महाराजा हुआ करते थे जिनके बारे में शायद ही कोई जानता हो .अगर हम भूतकाल में जाए तो हिंदुस्तान के ऐसे कई पन्ने मिलेंगे जिनको आज तक नहीं पलटा गया है ,हमारे देश में इतने ख़ास आदमी हुए जिनके बारे में ही शायद किसी को पता होगा .

भारत के सबसे धनवान व्यक्ति 

लेकिन आज हम आपको एक ऐसे हिंदुस्तान के घाराने की बात बता रहे है जिसके बारे में आप आज पहले बार सुनेंगे ,इस घाराने का उदय 1700 इसवी में हुआ था .

ये घराना अंग्रेजो के समय का सबसे अमीर घराना हुआ करता था की अंग्रेजभी इस घराने से कर्जा लेने आया करते थे ,हमने तो ज्यादातर ये सुना है की अंग्रेज हमारे ऊपर हुकम चलाते थे और जुल्म करते थे लेकिन कुछ ऐसे लोग भी थे जिनके सामने अंग्रेज भी सीस नवाते थे .

अंग्रेजो के समय में भारत में एक ऐसे आदमी भी थे जिनके आगे अंग्रेज भी सीस झुकाते थे और उनका नाम था मुर्सिदाबाद के जगत सेठ ,इनको jagat seth of mursidabad भी कहा जाता है .

जगत सेठ ने हमारे देश में टैक्स और पैसे के लेन देन को काफी सरल बनाया था ,उनके पास उस टाइम इतनी दौलत हुआ करती थी की वो मुग़ल सल्तनत और अंग्रेजो से डायरेक्ट लेन देन करते थे और जरूरत पड़ने पर उनको कर्जा भी दिया करते थे .

कोन थे ये जगत सेठ 

आज हम जिसकी बात कर रहे है वो थे मुर्सिदाबाद के ये जिला बंगाल में है और आज गुमनामी में है लेकिन एक समय में मुर्सिदाबाद बहुत बड़ा व्यापारिक केंद्र था इस जगह के चर्चे बहुत दूर दूर तक थे .

हर कोई इस जगत सेठ और इस जगह से काफी वाकिफ थे ,जगत सेठ को दुसरे शब्दों बैंक ऑफ़ वर्ल्ड कहा जाता है .ये उपाधि इनको मुग़ल बादशाह मुहम्मद शाह ने दिया था इसके बाद ही लोग इस घाराने को जगत सेठ के नाम से कहने लगे .सेठ मानिक चंद इस घाराने के संस्थापक थे और ये घराना उस समय का सबसे अमीर घराना था हिंदुस्तान में .

 

Ranjana Pandey

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *