मौनी रॉय और सूरज नाम्बियार का डिवोर्स: भारतीय कानून के अनुसार कितनी मिलेगी एलीमनी? जानिए क्या कहता है सुप्रीम कोर्ट का नियम 

Smina Sumra
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Mouni Roy Divorce News

Mouni Roy Divorce News:  बॉलीवुड एक्ट्रेस मौनी रॉय और सूरज नाम्बियार ने सोशल मीडिया पर एक आधिकारिक पोस्ट डालकर इस बात की घोषणा की और तब से ही फैंस सोशल मीडिया पर गुजारा भत्ता को लेकर चर्चा कर रहे हैं। कुछ लोग यह जानने को उत्सुक हैं कि मौनी को सूरज से एलीमनी के रूप में कितनी रकम मिलेगी। आइए आगे जानते हैं कि भारतीय कानून में तलाक के मामले में भरण-पोषण या एलीमनी किस आधार पर तय की जाती है।

Mouni Roy और Suraj Nambiar

अभिनेत्री मौनी रॉय और बिजनेस मैन सूरज नाम्बियार ने शनिवार को एक बार फिर ऑनलाइन एक-दूसरे को फॉलो करना शुरू कर दिया है। अलग हो चुके इस जोड़े ने हाल ही में अपने अलगाव की घोषणा के बाद एक-दूसरे को अनफॉलो कर दिया था। इस घटनाक्रम ने  फार्मर कपल की शादी के साथ-साथ उनकी सोशल मीडिया एक्टिविटीज को लेकर भी चर्चा को फिर से हवा दे दी है, जिन पर उनके अलग होने की खबर ऑनलाइन आने के बाद से ही फैंस की नजर बनी हुई है।

पहले फैंस ने गौर किया था कि मौनी और सूरज ने इंस्टाग्राम पर एक-दूसरे को अनफॉलो कर दिया था। हालांकि, इस खबर के प्रकाशित होने के समय Mouni Roy और सूरज ने फिर से एक-दूसरे को फॉलो करना शुरू कर दिया है। अफवाहों के विपरीत, मौनी ने अपनी शादी की तस्वीरें और सूरज (Mouni Roy Divorce News) के साथ पुरानी पोस्ट भी बरकरार रखी हैं, जबकि पहले ऐसी अफवाहें थीं कि उन्होंने उन्हें हटा दिया था।

भारतीय कानून के तहत गुजारा भत्ता कैसे निर्धारित किया जाता है और इससे जुड़े महत्वपूर्ण नियमों की बात करें तो, अदालत किसी मानक प्रतिशत को लागू करने के बजाय कुछ महत्वपूर्ण कारकों का मूल्यांकन करती है। आइए देखें कि ये कारक क्या हैं-

1. लंबे समय तक चलने वाले वैवाहिक संबंधों में एलीमनी की राशि आमतौर पर अधिक होती है।

2. गुजारा भत्ता की राशि अदालत द्वारा इस तरह निर्धारित की जाती है जिससे विवाह के दौरान पति-पत्नी के जीवन स्तर को बनाए रखा जा सके। 

3. यदि किसी साथी ने घर की जिम्मेदारियों के लिए अपने पेशेवर विकास का त्याग किया है, तो उसे प्राथमिकता दी जाती है। यदि पत्नी कमाने वाली है लेकिन उसकी आय पति की तुलना में बहुत कम है, तो भी उसे गुजारा भत्ता पाने का हकदार माना जा सकता है।

भारतीय न्यायालयों के विभिन्न निर्णयों के अनुसार मासिक गुजारा भत्ता के लिए 

निम्नलिखित आंकड़े उचित माने जाते हैं

: 1. सामान्यतः, पति की शुद्ध मासिक आय का लगभग 25% एक उचित मानक माना जाता है।

2. यदि दोनों पक्ष एकमुश्त राशि का भुगतान करके मामले को निपटाना चाहते हैं, तो सामान्यतः पति की कुल संपत्ति (संपत्ति, निवेश आदि) का 20% से 33% के बीच राशि तय की जा सकती है।

गुजारा भत्ता कब रोका जा सकता है?

आइए जानते हैं कि तलाक के मामले में गुजारा भत्ता कब रोका जा सकता है या बंद किया जा सकता है। कुछ परिस्थितियों में गुजारा भत्ता रोका जा सकता है:

1. यदि गुजारा भत्ता पाने वाला पति या पत्नी पुनर्विवाह कर लेता है, तो भुगतान तुरंत बंद हो जाता है।

2. यदि दोनों पक्ष समान आय अर्जित करते हैं और आर्थिक रूप से सक्षम हैं, तो न्यायालय गुजारा भत्ता न देने का आदेश दे सकता है।

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