बारिश के पानी से होती है लेप्टोस्पायरोसिस की समस्या हो सकते हैं इसके गंभीर परिणाम

Smina Sumra
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problem of leptospirosis: लेप्टोस्पायरोसिस गंभीर स्थिति में Weil’s Disease का रूप ले लेती है। जिसकी वजह से कई गंभीर समस्या हो सकती है। जैसे हाथ और पैर में सूजन और सीने में दर्द। आइए जानते हैं लेप्टोस्पायरोसिस के लक्षण, कारण और बचाव के तरीक़े

लेप्टोस्पायरोसिस एक प्रकार का जीवाणु संक्रमण होता है जो जानवर के मूत्र के माध्यम से फैलता है। ख़ासतौर पर खेत में मौजूद कुत्तों, चूहा और अन्य तरह के जीवो से। यह सभी जानवर लेप्टोस्पायरोसिस के वाहक होते हैं। हालांकि इनमें लेप्टोस्पायरोसिस के लक्षण नज़र नहीं आते हैं। लेप्टोस्पायरोसिस (problem of leptospirosis) एक बीमारी हो सकती है लेकिन फ्लू की तरह नहीं होती है। यह अधिक से अधिक 1 सप्ताह तक रह सकती है। उसे ज़्यादा नहीं।
लेप्टोस्पायरोसिस गंभीर अवस्था में Weils Disease का रूप ले लेती है। जो कई तरह की समस्याओं का कारण बन सकती है। जैसे हाथ और पैर में सूजन, सीने में दर्द इत्यादि। इस तरह की समस्या होने पर आपको कभी कभी अस्पताल में भर्ती होना पड़ सकता है।

:- लेप्टोस्पायरोसिस की समस्या किन लोगों में हो सकती है?
(Who can have the problem of leptospirosis)

इंटरोगन्स नामक जीवाणु की वजह से लेप्टोस्पायरोसिस की समस्या होती है। यह बैक्टीरिया जानवरों में पाया जाता है। जो जानवरों के गुर्दे में से पनपता है। ये जानवर और अपने पेशाब के माध्यम से जीवाणु मिट्टी या पानी में छोड़ देते हैं। अगर कोई व्यक्ति संक्रमित जानवर के पेशाब की हुई मिट्टी या पानी के संपर्क में आता है, तो यह बैक्टीरिया व्यक्ति के शरीर पर कटी हुई त्वचा जख्म या फिर सूखे ही स्थानों के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। कभी-कभी यह व्यक्ति के नाक किया फिर मुंह के माध्यम से भी अंदर प्रवेश कर जाते हैं। यह समस्या एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में आसानी से प्रवेश कर सकता है। हालांकि यह तभी संभव होता है जब व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति के साथ संबंध बनाता है या फिर स्तनपान कराता है।
अगर कोई व्यक्ति जानवरों के साथ अधिक समय बिताता है, तो उसमें भी यह संक्रमण फैलने का ख़तरा रहता है। अगर आप इस तरह का काम कर रहे हैं तो आपमें भी यह समस्या होने की संभावना अधिक हो सकती है। इसके अतिरिक्त निम्नलिखित लोगों में यह संक्रमण फैलने की संभावना बहुत ज्यादा होती है।

खेतों में लगातार काम करने वाले किसान

पशु के डॉक्टर

सीवर या खदान में काम करने वाले लोगों में (भूमिगत कार्यकर्ता)

कसाई खाने में काम करने वाले लोगों में

सैनिक कर्मचारी जैसे पुलिस सेना के जवान बाढ़ तथा आपदा प्रबंधन कर्मी

बारिश के पानी में लगातार खड़े रहने वाले व्यक्ति या काम करने वाले व्यक्ति को

इसके अलावा अगर आप जीवाणु से प्रभावित नदी या झील में राफ्टिंग करते हैं या अपने स्विमिंग करते हैं, तो आपको यह समस्या होने की संभावना अधिक हो जाती है।

:- लेप्टोस्पायरोसिस के लक्षण
(Symptoms of Leptospirosis)

लेप्टोस्पायरोसिस के लक्षण आमतौर पर 2 सप्ताह के अंदर नज़र आने लगते हैं। लेकिन कभी-कभी कुछ मामलों में इसके लक्षण 1 महीने तक भी नज़र नहीं आते हैं। जब यह समस्या अधिक गंभीर हो जाती है तो आपको बहुत तेज़ बुखार होने लगेगा। यह बुखार 104 डिग्री तक हो सकता है। इसके अलावा लेप्टोस्पायरोसिस के लक्षण निम्नलिखित प्रकार के होते हैं

सिर में दर्द

मांसपेशियों में दर्द

आंखों और त्वचा का पीला पड़ना

उल्टी

दस्त

स्किन पर लाल चकते होना

इस समस्या के लक्षण अन्य बीमारियों के समान होते हैं। इसका पता लगा पाना बेहद मुश्किल होता है। ऐसे में आप अपने स्वास्थ्य की जांच करा कर इस रोग का पता कर सकते हैं। इसके लिए डॉक्टर आपके ब्लड की जांच करते हैं। साथ साथ इसके इलाज के लिए ब्लड टेस्ट के अलावा किडनी और लिवर फंक्शन टेस्ट और सिरम टेस्ट भी करते हैं।

:- लेप्टोस्पायरोसिस का इलाज और बचाव के तरीके
(Ways to treat and prevent leptospirosis)

इस समस्या का इलाज एंटीबायोटिक दवाओं से किया जाता है। जिनमें पेनिसिलिन और डॉक्सीसाइक्लिन मौजूद है। डॉक्टर आपकी बुखार और मांसपेशियों के दर्द को कम करने के लिए इबुप्रोफेन दे सकते हैं। अगर आपकी समस्या अधिक गंभीर है, तो आपको डॉक्टर अस्पताल में भर्ती भी कर सकते हैं। इसके लक्षणों में गुर्दे की विफलता मेनिनजाइटिस और फेफड़ों की परेशानियां भी हो सकती है। शरीर में आपको एंटीबायोटिक इंजेक्शन लेने की जरूरत हो सकती है। अधिक गंभीर स्थिति होने पर संक्रमण आपके अंगों को अधिक नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बचाव के लिए निम्नलिखित बातों पर ख़ासतौर पर ध्यान देना चाहिए।

1. गंदे पानी से बचकर रहें।

स्वच्छ पानी पिएं। ना ही दूषित पानी पिए और ना ही इसके संपर्क में रहें। क्योंकि लेप्टोस्पायरोसिस शरीर में अन्य माध्यमों से भी प्रवेश कर सकता है। जैसे तैराकी नौकायन या मछली पकड़ने के दौरान। इसलिए इस तरह के काम करने से आपको बचना चाहिए। आमतौर पर खारा पानी आपके लिए सुरक्षित होता है।

2. संक्रमित जानवर से ख़ासतौर पर जंगली चूहों से दूर रहें।

चूहा बैक्टीरिया का मुख्य वाहक होता है। पश्चिमी देशों में भी लगभग 20% जंगली चूहा की आबादी हो सकती है। ऐसी स्थिति में आपको जंगली चूहो के संपर्क में आने से सावधान रहना चाहिए।

3. यात्रा करते समय ख़ासतौर पर ध्यान देना चाहिए।

लेप्टोस्पायरोसिस गंदी जगह पर आसानी से फैलते हैं। और इससे बचना बेहद मुश्किल हो जाता है। इसलिए इसके लक्षण नज़र आने पर या बीमार पड़ने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

4. कीटाणु नाशक का इस्तेमाल करें।

बैक्टीरिया के लिए ब्लीच, लाइसोल एसिड सॉल्यूशन और आयोडीन बेहद घातक होते हैं। ऐसी स्थिति में आप कीटाणुनाशक का इस्तेमाल कर सकते हैं।

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