कपालभाति प्राणायाम के प्रकार, फ़ायदे, सावधानियां और करने का सही तरीक़ा

Smina Sumra
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Kapalbhati pranayama:कपालभाति प्राणायाम के तीन मुख्य प्रकार होते हैं। आइए जानते हैं इन्हें कैसे करते हैं तथा इन्हें करने का तरीका।

Kapalbhati pranayama: कपालभाति संस्कृत भाषा का शब्द है। कपालभाति दो शब्दों से मिलकर बना है पहले शब्द कपाल का अर्थ सिर की हड्डी से है जबकि दूसरे शब्द भाति का अर्थ तेज है जबकि तीसरे शब्द प्राणायाम के अर्थ श्वास लेने और छोड़ने की विशेष प्रक्रिया से हैं। कपालभाति (Kapalbhati pranayama) करने से खून साफ होता हैं। अगर आप रोजाना कपालभाति करेंगे तो एकाग्रता में सुधार होगा तथा चेहरा भी चमकदार बनेंगे।

कपालभाति के प्रकार (Types of kapalbhati)

कपालभाति के मुख्य तीन प्रकार होते हैं:- वातक्रम, व्युत्क्रम और शीतक्रम

1. वातक्रम कपालभाति (vatakarma kapalbhati)

वात का अर्थ है वायु और कर्म का अर्थ है क्रिया। वातक्रम में व्यक्ति आराम की स्थिति में बैठ जाता है और अपनी एक उंगली से एक नाक के छेद को बंद करता है और दूसरे छेद से सांस खींचता है ऐसी क्रिया बार-बार करता है।

वातक्रम कपालभाति कैसे करें? (vatakarma kapalbhati)

:- ध्यान से किसी आसन पर बैठ जाएं।

:- कमर, गर्दन और रीढ़ की हड्डी को बिल्कुल सीधा रखें।

:- दोनों हाथों को घुटनों पर रखें ।

:- गहरी सांस ले फिर नाक से सांस को बाहर की ओर छोड़ें तथा पेट को अंदर की ओर खींचें।

:- तत्पश्चात आराम कर बार-बार इस क्रिया को दोहराते रहें।

वातक्रम कपालभाती करने के फ़ायदे (Benefits of kapalbhati)

:- मोटापा को कम करता है तथा फेफड़ों की क्षमता को बढ़ाता हैं।

:- मस्तिष्क शोधन कर मानसिक रोगों को दूर करता हैं।

:- त्वचा चमकदार बनती है तथा नसों की समस्या को दूर करने में ये प्राणायाम बहुत फायदेमंद हैं।

2. व्युत्क्रम कपालभाति (Vyutkarama kapalbhati):-

व्युत का अर्थ उल्टा तथा कर्म का अर्थ क्रिया होता है इस क्रिया में नाक से पानी भरकर मुंह से निकाला जाता है।

व्युत्क्रम कपालभाति कैसे करें?(Vyutkarama kapalbhati):-

:- सर्वप्रथम हल्का नमक युक्त गुनगुना पानी लें।

:- आराम की मुद्रा में सीधे होकर आगे की ओर झुकें।

:- अब किसी पात्र में पानी भरकर उसमें अपने नाक के छिद्रों को पानी में डुबाना हैं।

:- फिर उसी पानी को मुंह की सहायता से बाहर की ओर निकालना हैं।

:- इस क्रिया को दो से चार बार दोहराएं फिर नाक सुखा लें।

व्युत्क्रम कपालभाति करने के लाभ (Benefits of Vyutkarama kapalbhati):-

:- इस प्राणायाम को करने से नासिका मार्ग को स्वच्छ किया जा सकता हैं।

:- इस क्रिया को करने से बीपी की समस्याएं कम हो जाती हैं।

:- आंखों के रोगों को दूर करती है तथा डिप्रेशन के लक्षण कम होते हैं।

3. शीतक्रम कपालभाति (sheetkarama kapalbhati):-

शीत का अर्थ ठंडा और क्रम का अर्थ क्रिया।इस क्रिया से ठंडक मिलती है इसलिए इसे शीतक्रम कपालभाति कहते हैं।

शीतक्रम कपालभाति करने की क्रियाविधि (sheetkarama kapalbhati)

:- सबसे पहले हल्का नमक डाला हुआ गुनगुना पानी लें।

:- आराम की स्थिति में आप आगे की ओर झुक के पानी को ग्लास की मदद से मुंह में डालकर पूरा मुंह भर लें।

:- नाक से गहरी सांस लें फिर ऊपर खींचते हुए नाक से पानी निकाले ऐसा दो से तीन बार करें।

:- फिर नाक को अच्छे से सूखा लें।

शीतक्रम कपालभाति के फ़ायदे ( Benefits of sheetkarama kapalbhati):-

:- इस क्रिया से शरीर और दिमाग को ऊर्जा मिलती हैं।

:- शीतक्रम कपालभाती करने से बुढ़ापे में होने वाली बीमारी आप कुछ भी नहीं सकती हैं।

:- शीतक्रम कपालभाति करने से गैस की समस्या पेट में दर्द की समस्या अल्सर आदि नहीं होता।

:- आइए जाने किन-किन लोगों को कपालभाति नहीं करना चाहिए।

:- अगर आप गर्भवती हैं तो आपको कपालभाति नहीं करना चाहिए।

:- जिन लोगों को सांस से जुड़ी समस्या है उन्हें कपालभाति करने से बचना चाहिए।

:- पीरियड्स के दौरान दर्द की समस्या को देखते हुए उस समय कपालभाती नहीं करना चाहिए।

:- अगर आपको माइग्रेन, बीपी है तो कपालभाति प्राणायाम नहीं करना चाहिए।

:- हदय रोग वाले लोगों को कपालभाति नहीं करना चाहिए।

कपालभाति प्राणायाम आप अकेले भी कर सकते हैं लेकिन इसके लिए इस प्रकार को करने के लिए किसी एक्सपर्ट की सहायता लेनी चाहिए। डाक्टर की सलाह पर ही इस क्रिया करनी चाहिए।

 

 

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